सोशल मीडिया के दायरे में सिमटे रिश्ते
आधुनिक बनने और दिखने की इस होड़ में सब कुछ तकनीकी सुविधाओं में लिप्त हो गया है डिजिटल इंडिया के इस दौर में ऑफिस का काम हो या घर परिवार के रिश्ते सब सोशल मीडिया के दायरे में जकडते जा रहे हैं ।

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आधुनिक बनने और दिखने की इस होड़ में सब कुछ तकनीकी सुविधाओं में लिप्त हो गया है डिजिटल इंडिया के इस दौर में ऑफिस का काम हो या घर परिवार के रिश्ते सब सोशल मीडिया के दायरे में जकडते जा रहे हैं ।

हम यह भूलते जा रहे है कि इसके बाहर भी एक दुनिया है जहाँ शायद युवाओं की ज्यादा जरूरत है बजाय की सोशल मीडिया पर कुछ सम्वेदनशील या देश भक्ति की पोस्ट को शेयर करने से ।

पहले का समय वो भी हुआ करता था जब सोशल मीडिया का नशा नहीं था बच्चे अपने माता पिता के सुख दुख पूछा करते थे । उनके समीप बैठ कर उनसे इत्मीनान से बाते करते थे जिंदगी की भाग दौड़ ने इसे पूरी तरह से बदल दिया है

आज हाल ये हो चला है कि रिश्तो में कितना गहरा संबंध है ये भी सोशल मीडिया पर जग जाहिर करके बताया जाता है, चाहे वास्तविक जिंदगी में रिश्तों से कटाव बढ़ता जा रहा हो लेकिन सोशल मंच पर दिखावा जरूरी है |

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