शहीद दिवस - एक बलिदान
एक देश तभी देश कहलाता है जब उस देश की निर्धारित भूमि पर लोग अर्थात जनता निवास करती है और अपनी संपदा व जीवन निर्वाह के लिए देश पर निर्भऱ और खुद देश के प्रति जिम्मेवार हो जाती है। लेकिन प्रशासनिक, न्यायिक, सवैधानिक व भूगौलिक स्थितियाँ ही देश को पूर्ण बनाती है। लेकिन इन सब में एक कड़ी सबसे महत्वपूर्ण है और वह है ‘सुरक्षा’ क्योंकि बिना सुरक्षा के देश व देश की जनता सुरक्षित ही नहीं रह सकती।

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एक देश तभी देश कहलाता है जब उस देश की निर्धारित भूमि पर लोग अर्थात जनता निवास करती है और अपनी संपदा व जीवन निर्वाह के लिए देश पर निर्भऱ और खुद देश के प्रति जिम्मेवार हो जाती है। लेकिन प्रशासनिक, न्यायिक, सवैधानिक व भूगौलिक स्थितियाँ ही देश को पूर्ण बनाती है। लेकिन इन सब में एक कड़ी सबसे महत्वपूर्ण है और वह है ‘सुरक्षा’ क्योंकि बिना सुरक्षा के देश व देश की जनता सुरक्षित ही नहीं रह सकती। ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिर इसके लिए कौन उत्तरदायी है? यह क्षेत्र प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत आता है जिसमें पुलिस, सैन्य अधिकारी व सरहद पर तैनात सिपाही होते है ये कोई अन्य देश या क्षेत्र से आंए लोग नहीं ये हमारे बीच से ही मौजूद लोग होते है और हमारी सुरक्षा के लिए उत्तरदायी होते है। हमारा देश (भारत) और मैं भारतीय नागरिक, मैं इस देश में सुरक्षित तभी महसूस करूंगी जब मैं स्वतंत्र होगी लेकिन यहाँ स्वतंत्रता का अर्थ चोरी, कर्तव्यहीन कार्य से नहीं है अपितु साँस लेने की स्वतंत्रता और आवागमन व खुद के फैसले लेने की स्वतंत्रता में ही सुरक्षा प्रदान हो । अगर सोचिए अगर आपको यह सभी अधिकार व अनुमति ना हो तो क्या आप खुद को सुरक्षित महसूस कर पाएंगे? या सैनिक सरहद पर मौजूद ना हो तो ?

आप सोच रहे होंगे आज मैं यह क्यो कह रही हूँ आज कोई शहीद दिवस तो नहीं है ! बिल्कुल आज कोई खास दिन है लेकिन कुछ है यहीं इस दिन को खास बनाता है। आप या हम सब 30 जनवरी व 23 मार्च को ही शहीद के रूप में जानते व मनाते है लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसी तारिखे है जो शहीद दिवस में हमेशा याद रखी जानी चाहिए क्योंकि अन्य और भी तारिखो को कई शहीदो ने देश की रक्षा करते करते अपना बलिदान दे दिया उन्ही में से एक है 13 जुलाई की तारिख इसी दिन सन् 1931 को देश का अभिन्न व सबसे खुबसूरत अंग जम्मू - कश्मीर में राजा हरिसिंह के शासन काल में राजा के सामने प्रर्दशन के दौरान रॉयल सैनिको नेे 22 लोगों की हत्या कर दी थी। उनकी ही याद में जम्मू - कश्मीर में 13 जूलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। और इस तरह यह दिन खास होकर भी खास है लेकिन 30 जनवरी और 23 मार्च को मनाया जाने वाला शहीद दिवस अपने आप ही महत्वपूर्ण है। इन दोनो दिनो की अपनी अपनी विशेषता है।

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