बदलाव जरुरी है
अक्सर यह देखा गया है कि हम जिस समाज में रहते है, उन्हीं के हिसाब से हमे अपनी जिंदगी को ढालना पड़ता है, चाहे बात हमारे परिधान (कपड़ा) का हो या खान-पान का इत्यादि। इन सभी बातों को लेकर आज भी हमारे समाज के लोग एक दूसरे की निंदा करने से पीछे नही हटते है, आखिर कब तक हम यूवा पीढी इस खोखले समाज के द्वारा बनाये गए रिवाज को यू ही ढोते रहेंगे और हमेशा इसी डर में हम जीते रहेंगें कि कही हम से कोई ऐसी गलती ना हो, जिसकी वजह से हमारे परिवार की इज्जत मिट्टी में मिल जाए।

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अक्सर यह देखा गया है कि हम जिस समाज में रहते है, उन्हीं के हिसाब से हमे अपनी जिंदगी को ढालना पड़ता है, चाहे बात हमारे परिधान (कपड़ा) का हो या खान-पान का  इत्यादि। इन सभी बातों को लेकर आज भी हमारे समाज के लोग एक दूसरे की निंदा करने से पीछे नही हटते है, आखिर कब तक हम यूवा पीढी इस खोखले समाज के द्वारा बनाये गएरिवाज को यू ही ढोते रहेंगे और हमेशा इसी डर में हम जीते रहेंगें कि कही हम से कोई ऐसी गलती ना हो, जिसकी वजह से हमारे परिवार की इज्जत मिट्टी में  मिल जाए। 

जब हमारे देश को चलाने वाले सरकारी व्यवस्थाओं को कोई आपत्ती नही है, क्योंकि हमारे देश का सविधान हमें खुल कर जीनें का अधिकार देता है,तो फिर ये  समाज के लोग कौन होते हैं जो अक्सर हमारी खुशियों पर ग्रहण लगाते है।

अक्सर माँ-बाप अपने बच्चों को खासतौर पर बेटियों को यही  सिख देते रहते है,कि वो कोई ऐसा काम ना करें जिसकी वजह से उनकी इज्जत का भरी समाज में मजाक बनाया जाय, आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा और कब तक हम अपनी खुशियों का यू हि गला घोटते रहेंगें,वो भी इसलिय क्योंकि हम एक लड़की हैं, आखिर इतना भेद-भाव क्यों? जब इस देश के सभी नागरिक को एक समान अधिकार दिया गया है, उन्हे खुलकर जीनें का हक मुहैया किया गया है,फिर ये समाज कौन होता है,जिनके बारे में सोचकर अक्सर लड़कियों के  पांव में जंजीर बांध दिया जाता हैं।

पढ़िए पूरी कहानी बदलाव जरुरी है

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