पत्रकारिता समाज का दर्पण है।
आप और हम सब जानते है कि पत्रकारिता अर्थात मीडिया को देश के चौथे स्तंभ के रूप में जाना जाता है लेकिन क्या आज पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को देखते हुए विद्यार्थियो द्वारा इस विषय को चयन करने और इसमें अपना करियर तलाशने में उन्हे किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता व वह किस तरह इस क्षेत्र में खुद को सुरक्षित महसूस कर सकते है |

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आप और हम सब जानते है कि पत्रकारिता अर्थात मीडिया को देश के चौथे स्तंभ के रूप में जाना जाता है लेकिन क्या आज पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को देखते हुए विद्यार्थियो द्वारा इस विषय को चयन करने और इसमें अपना करियर तलाशने में उन्हे किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता व वह किस तरह इस क्षेत्र में खुद को सुरक्षित महसूस कर सकते है

इन्ही सब को देखते हुए 6 व 7 जुलाई को सेंट्रल फॉर मीडिया रिसर्च एण्ड एनालिसिस द्वारा दिल्ली के राजघाट स्थितगांधी स्मृति में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के दो दर्जन संस्थाओ के ढाई सौ छात्र - छात्राओं ने भाग लिया । जिसमेें मीडिया क्षेत्र से संबधित व इसमें कार्यरत और दिग्गज पत्रकारों ने अपने अनुभवो को साझा किया और विद्यार्थियों की जिज्ञासा व उनके प्रश्नो का उत्तर दे कार्यक्रम को सफल बनाया।

CMRA द्वारा आयोजित दो दिवसीय "मीडिया कार्यशाला 2019" के दूसरे दिन के पहले सत्र में zee मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार आदर्श पांडे जी ने सत्र के विषय के अनुरूप टीवी प्रोडक्शन के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस तरह एक स्टोरी को पूरी प्रक्रिया से गुजरना होता हैं। जिसमे सबसे महत्वपूर्ण स्थान ग्राफ़िक्स और रचनात्मक क्रिया का होता है।

पढ़िए पूरी कहानी पत्रकारिता समाज का दर्पण है

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