दिन-प्रतिदिन बढ़ती जनसंख्या, खत्म होते संसाधन
भारत और भारत की जनसंख्या का रिश्ता कुछ इस प्रकार का है कि कभी घटता ही नही दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जाता है।

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पढ़िए पूरी कहानीभारत और भारत की जनसंख्या का रिश्ता कुछ इस प्रकार का है कि कभी घटता ही नही दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जाता है।

हमारी सामूहिक भौतिक समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या जनसंख्या वृद्धि की है । जनसंख्या का संसाधन से ज्यादा बढना भी देश और देश की सरकार के साथ - साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक होता हैं। भारत की जनसंख्या अगर इसी प्रकार बढ़ती रही तो वो दिन दूर नहीं जब हम चीन को पीछे छोड़ देंगे ।

वल्ड पॉपुलेशन प्रोस्पेक्टस 2019 की रिपोर्ट के अनुसार भारत 2027 मे चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक जन संख्या वाला देश बन जाएगा ।

भारत पहले ही हर क्षेत्र में पिछड़ा है वो चाहे बेरोजगारी हो या प्रदूषण, पर्यावरण, अशिक्षा, गरीबी। ऐसे में भारत की जनसंख्या का बढ़ना देश के लिए घातक है जो अपराधों को जन्म देगी ।

भारत की भूमि वर्तमान अर्थ व्यवस्था जितने लोगो का भार वहन कर सकती है उसकी अपेक्षा आबादी कहीं अधिक होने से राष्ट्रीय अर्थ सन्तुलन बिगड़ता जिसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव प्रत्येक नागरिक पर बुरा ही पड़ता है ।

"प्रसिद्ध अर्थ शास्त्री माल्थस" ने लिखा है कि जिस गति से जनसंख्या का प्रवाह बढ़ता है उस गति से उत्पादन बढा सकना सम्भव नहीं हो सकता इसलिए समझदार लोगों का कर्तव्य है कि अपने समाज मे अनावश्यक जनसँख्या न बढ़ने दे। 

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