एक शब्द - अनदेखा
एक शब्द है, "अनदेखा" जो शायद हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है। सिर्फ़ किसी खास जगह अथवा मौके पर ही अनदेखी नहीं होती है बल्कि यह हमारे रोज मर्रा के जीवन का हिस्सा बन गया है । जगह जरूरत कैसी भी हो अनदेखी करना हमारी आदत है।

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एक शब्द है, "अनदेखा" जो शायद हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है। सिर्फ़ किसी खास जगह अथवा मौके पर ही अनदेखी नहीं होती है बल्कि यह हमारे रोज मर्रा के जीवन का हिस्सा बन गया है । जगह जरूरत कैसी भी हो अनदेखी करना हमारी आदत है।

कहीं कोई दुर्घटना हो जाये, अनदेखा कर के चले जाते हैं, और कहते हैं कि कौन परे किसी के झमेले में। कहीं कोई अपराध हो रहा हो अनदेखा कर के निकलो वहां से, बीच बचाव करने की कोई आवश्यकता नहीं है। कोई कुछ गलत करता हो अनदेखा कर दो,कहीं कोई गंदगी फ़ैली है अनदेखी करके निकल जाओ , कोई घूस लेता हो अनदेखा कर दिया। कोई भी घटना हो वह चाहे घर में हो या बाहर,किसी सरकारी विभाग में हो या निजी संस्थानों में, घटना किसी बच्चे से जुड़ी हो या बहु बेटियों से जब तक घटना दुर्घटना में न बदल जाए तब तक अनदेखी करना हमारी आदत का हिस्सा  है।

जब समय हमारे हाथों से निकल जाता है। घटना किसी बड़े दुर्घटना का रूप ले लेता है , तब हमारी नींद खुलती हैं और हम मोमबत्तियां लेकर सड़क चौराहे पर प्रदर्शन शुरू कर देते हैं। सरकारी विभागों, नेताओं, सरकारी संपत्तियों इन सबका पुर जोड़ विरोध प्रदर्शन शुरू करने लगते हैं। अपना आक्रोश हम सरकारी सम्पत्तियों अथवा निर्दोषों पर निकालते हैं। मानो उस समय ऐसा लगता है जैसे कि आज समाज और सरकार दोनों ही जाग जाएंगे अथवा दुबारा अब कोई भी ऐसी दुर्घटना नहीं घटेगी।

पढ़िए पूरी कहानी अनदेखा

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